ज्ञानकृति: जहाँ तर्क और रचनात्मकता का समागम होता है


जैसा कि नाम से ही ज्ञात होता है हम ज्ञान और कृति का संगम हैं।  कुछ ५० वर्ष पहले सिगमंड फ्रुड (१९५८) ने सुझाया था कि - "खेल के समय हर बच्चा एक रचनाशील लेखक है जिसमे वह स्वयं का एक विश्व निर्मित करता है या अपने आसपास की वस्तुओं को अपनी इच्छा एवं खुशी अनुसार जमाता है।  एक रचनाधर्मी लेखक भी कुछ इसी तरह लेखन कार्य करता है।  वह एक काल्पनिक विश्व निर्मित करता है जिसमे वह कई भावनाएं निवेश करता है।"

logiccreativity hi

 

इसी विचारधारा पर कार्य करते हुए हमने एक ऐसा वातावरण निर्मित किया है जिसमे बच्चे स्वयं से सिखने के लिए प्रेरित होते है| हम बच्चे की तर्कशक्ति और रचनाधर्मिता को साथ लाकर उनका समग्र विकास करते हैं जिससे वे स्कूल जीवन व उसके उपरांत भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। इस उद्देश्य को पाने हेतु हम निम्नलिखित कदम उठाते है:

  • व्यक्तिगत ध्यान: कक्षा का आकर छोटा रखना (प्रीस्कूल में १५ विद्यार्थी एवं जूनियर स्कूल में २५ विद्यार्थी)। हर बच्चे की की प्रगति का व्यापक एवं सतत आकलन। विस्तार से हर बच्चे का व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाये रखना| शिक्षकों द्वारा बच्चों के घर की यात्रा करना। बच्चों के व्यक्तिगत असमानता को ध्यान में रखते हुए बनाई गयी शिक्षण व्यवस्था।
  • गतिविधियों के द्वारा शिक्षण: प्रीस्कूल का पाठ्यक्रम पुर्णतः गतिविधियों पर आधारित है। विद्यालय में व्यावहारिक शिक्षण, शिक्षण यात्रा, प्रायोगिक शिक्षण, परीक्षण करना, पहेली एवं खेल के माध्यम से सिखने पर बल दिया जाता है।
  • विविध प्रकार के खेल एवं अन्य गतिविधियाँ: जिज्ञासा एवं आत्म-सम्मान के विकास हेतु सभी विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक उन्नति का मौका दिया जाता है। विद्यार्थी तरह - तरह के  अनुभव एवं गतिविधियों से रूबरू होते है। इनमे कुछ प्रमुख है- नृत्य, टेनिस, स्केटिंग, संस्कृत, सैर, प्राकृतिक शिविर, ५ वी कक्षा के उपरांत विद्यार्थि कई गतिविधियों को भी चुन सकता है जैसे की - माउथ ऑर्गन, तबला, कीबोर्ड, ड्रम, पॉटरी, कला, संगीत एवं नृत्य, बास्केटबॉल और फुटबॉल।