आधुनिक गुरुकुल

गुरुकुल शिक्षा प्रणाली छात्रों को सनातन धर्म के बारे में ज्ञान प्रदान करती है, प्रकृति, योगासन, जीवन की व्यावहारिक स्थितियों के बारे में बतलाती है। आधुनिक शिक्षा प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, नवीनतम गैजेट इत्यादि के बारे में ज्ञान प्रदान करती है। छात्रों के लिए क्या बेहतर है?

हमें दोनों के एकीकरण की जरूरत है

आधुनिक शिक्षा प्रणाली समय के साथ विकसित हुई है और पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित हुई है। प्रौद्योगिकी में बदलाव और प्रगति से वह प्रभावित हुई है। एकमात्र कमी यह है कि जब व्यावहारिक ज्ञान के स्थान पर सैद्धांतिक भाग पर बल दिया जाता है। जब कहीं भी सामान्य समझ और अवसरों की बात आती है तो कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि आधुनिक शिक्षा अधिक प्रभावी है। यह प्रणाली हर किसी के लिए उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार इसे उससे ज्ञानार्जन कर सके।

अब हमें गुरुकुल पद्दति को समझने की जरूरत है: यह कैसे काम करती है, अतीत में सामजिक व्यवस्था कैसी थी और वर्तमान परिस्थिति में गुरुकुल शिक्षण का उद्देश्य कैसे पूरा किया जा सकता है। पुराने युग की नक़ल करने से कुछ नहीं होगा आज अगर हमें गुरुकुल पद्दति जीवित रखनी है और आज के आम जन को प्रभावित करना है तो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और पुरानी परंपरा दोनों का उचित समावेश करना चाहिए। आधुनिक गुरुकुल शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वे केवल वर्तमान ढांचे की शिक्षा न हो, बल्कि उससे भी परे। गुरुकुल स्नातकों को अपने साथियों की तुलना में किसी भी क्षेत्र में कमतर महसूस न करना पड़ें।

हम अपने आधुनिक गुरुकुल में क्या करते हैं?

आधुनिक शिक्षा: हम पढाई में वह सब कुछ करते हैं जो एक आम भारतीय अंग्रेजी माध्यमिक विद्यालय करता है। वास्तव में अकादमिक उत्कृष्टता हमारा प्राथमिक उद्देश्य है। मध्य प्रदेश में ज्ञानकृति ही एकमात्र विद्यालय है जो एच.बी.सी.एस.ई, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च द्वारा विकसित विज्ञान पाठ्यक्रम का अनुसरण करता है। एच.बी.सी.एस.ई वह संगठन है जो ओलंपियाड, एन.आई.यू.एस और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है। आप हल्का-फुक्ला विज्ञान ब्लॉग पर हमारे विज्ञान पाठ्यक्रम के बारे में अधिक पढ़ सकते हैं: http://smallscience.hbcse.tifr.res.in/category/view-from-the-classroom/gyankriti-school-indore/

वैदिक शिक्षा: प्राचीन साहित्य के अध्ययन के द्वारा वैदिक ज्ञान, महाकाव्य, कहानियों आदि हमारे स्कूल पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य विषय है। हम शिक्षा और शोध का एक संतुलित पाठ्यक्रम प्रदान करके सनातन धर्म के अध्ययन में अकादमिक उत्कृष्टता और उन्नति चाहते हैं। इस विषय में शामिल हैं:

  • हमारे समय में रामायण और महाभारत: यह साधारण बात हो गयी है कि छात्रों ने रामायण और महाभारत के भारतीय महाकाव्यों को नहीं पढ़ा है, उन्हें केवल मौखिक कहानियों या टेलीविजन धारावाहिकों के रूप में अनुभव किया है। चूंकि ये महाकाव्य समकालीन समाज के लिए एक सांस्कृतिक दर्पण प्रदान करते हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि छात्र न केवल इन कहानियों से केवल परिचित हो बल्कि उस साहित्य की भी सराहना करते हैं जिनमें उन्हें बताया गया है।
  • जातक, हितोपदेश, पंचतंत्र कथाएं: भारत में जन्मी छोटी कहानियों का एक महान संग्रह। इसका उद्देश्य स्कूल के युवा बच्चों में नैतिक मूल्यों और नेतृत्व कौशल को विकास करना है।
  • संस्कृत भाषा: प्रत्येक कक्षा में संस्कृत भाषा पढाई जाती है। प्रीस्कूल में, संस्कृत भाषा को कविताओं और गीतों के माध्यम से पढ़ाया जाता है। MRI स्कैन से ज्ञात हुआ हैं कि प्राचीन मंत्रों को याद रखने से संज्ञानात्मक कार्य से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्रों का आकार बढ़ जाता है https://blogs.scientificamerican.com/observations/a-neuroscientist-explores-the-sanskrit-effect/
  • अन्य:
    • योग और ध्यान 6 साल की उम्र के बाद छात्र के जीवन का एक अभिन्न अंग है।
    • सभी भारतीय त्यौहार स्कूल में मनाए जाते हैं और बच्चे संबंधित कहानियों के बारे में जानते हैं।
    • बच्चे दीक्षांत जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर परंपरागत तरीके से यज्ञ समारोह (हवन) का अभ्यास करते हैं।
    • मुख्य विद्यालय परिसर में बच्चों को प्रकृति के करीब लाने के लिए गौशाला और प्राकृतिक खेती का प्रावधान हैं।